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आंसुओं से धुली ख़ुशी की तरह

आंसुओं से धुली ख़ुशी की तरह रिश्ते होते हैं शायरी की तरह जब कभी बादलों में घिरता है चाँद लगता है आदमी की तरह किसी रोज़न किसी दरीचे से सामने…

मौला मेरे कर अहसान 

तेरे मेरे क्या दरमियान क्या राज क्या पहचान तू मेरी जात  और मुझसे तेरी पहचान खुदा रहे बस अब यु मेहरबान मौला मेरे कर अहसान इश्क़ अल्लाह का नाम दूजा इश्क़…

किसे ख़बर थी तुझे इस तरह सजाऊंगा

किसे ख़बर थी तुझे इस तरह सजाऊंगा ज़माना देखेगा और मैं न देख पाऊंगा हयातों मौत फ़िराक़ों विसाल सब यकजा मैं एक रात में कितने दीये जलाऊंगा पला बढ़ा हूँ…

एक चेहरा साथ-साथ रहा जो मिला नहीं 

एक चेहरा साथ-साथ रहा जो मिला नहीं किसको तलाश करते रहे कुछ पता नहीं शिद्दत की धूप तेज़ हवाओं के बावजूद मैं शाख़ से गिरा हूँ नज़र से गिरा नहीं…

नज़र से गुफ़्तगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह 

नज़र से गुफ़्तगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह ग़ज़ल ने सीखे हैं अंदाज़ सब तुम्हारी तरह जो प्यास तेज़ हो तो रेत भी हैं चादरे आब दिखाई दूर से देते हैं…

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में, कि मेरी नज़र को ख़बर न हो मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर न हो वो बड़ा रहीमो-करीम है, मुझे…

क्यों चुराते हो देखकर आँखें

क्यों चुराते हो देखकर आँखें कर चुकीं मेरे दिल में घर आँखें ज़ौफ़ से कुछ नज़र नहीं आता कर रही हैं डगर-डगर आँखें चश्मे-नरगिस को देख लें फिर हम तुम…