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रंग पैराहन का, ख़ुशबू जुल्फ़ लहराने का नाम

रंग पैराहन का, ख़ुशबू जुल्फ़ लहराने का नाम मौसमे गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम दोस्तो, उस चश्म-ओ-लब की कुछ कहो जिसके बग़ैर गुलसिताँ की बात रंगीं है,…

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए उस के बाद आए जो अज़ाब आए बामे-मीना से माहताब उतरे दस्ते-साक़ी में आफ़्ताब आए हर रगे-ख़ूँ में फिर चिराग़ाँ हो सामने फिर वो…

कुछ दिन से इंतज़ारे-सवाले-दिगर में है

  कुछ दिन से इंतज़ारे-सवाले-दिगर में है वह मुज़्महिल हया जो किसी की नज़र में है सीखी यहीं मिरे दिले-काफ़िर ने बंदगी रब्बे-करीम है तो तिरी रहगुज़र में है माज़ी…

न पूछ क्या काम कर गई है, दिलो-नज़र में उतर गई है

न पूछ क्या काम कर गई है, दिलो-नज़र में उतर गई है. तेरी नज़र सब को आज़माए, तेरी नज़र कौन आज़माए. शिगुफ़्ता१ दिल को न कर सकेगा, रुका-रुका ज़ेरे-लब तबस्सुम२.…

कर गई काम वो नज़र, गो उसे आज देखकर

कर गई काम वो नज़र, गो उसे आज देखकर. दर्द भी उठ सका नहीं,रंग भी उड़ सका नहीं. तेरी कशीदगी में आज शाने-सुपुर्दगी भी है. हुस्न के वश में क्या…

होकर अयाँ वो ख़ुद को छुपाये हुए-से हैं 

होकर अयाँ वो ख़ुद को छुपाये हुए-से हैं अहले-नज़र ये चोट भी खाये हुए-से हैं वो तूर हो कि हश्रे-दिल अफ़्सुर्दगाने-इश्क हर अंजुमन में आग लगाये-हुए-से हैं सुब्हे-अज़ल को यूँ…

जो बात है हद से बढ़ गयी है 

जो बात है हद से बढ़ गयी है वाएज़ के भी कितनी चढ़ गई है हम तो ये कहेंगे तेरी शोख़ी दबने से कुछ और बढ़ गई है हर शय ब-नसीमे-लम्से-नाज़ुक…

शिकस्त

अपने सीने से लगाये हुये उम्मीद की लाश मुद्दतों ज़ीस्त को नाशाद किया है मैनें तूने तो एक ही सदमे से किया था दो चार दिल को हर तरह से…

शाहकार

मुसव्विर मैं तेरा शाहकार वापस करने आया हूं अब इन रंगीन रुख़सारों में थोड़ी ज़िदर्यां भर दे हिजाब आलूद नज़रों में ज़रा बेबाकियां भर दे लबों की भीगी भीगी सिलवटों…

एक मुलाक़ात

तिरी तड़प से न तड़पा था मेरा दिल,लेकिन तिरे सुकून से बेचैन हो गया हूँ मैं ये जान कर तुझे जाने कितना ग़म पहुचें कि आज तेरे ख़यालों में खो…