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मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया

मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया बरबादियों का सोग़ मनाना फ़ुजूल था बरबादियों का जश्न मनाता चला गया जो मिल गया…

नज़रे-कालिज

ऐ सरज़मीन-ए-पाक़ के यारां-ए-नेक नाम बा-सद-खलूस शायर-ए-आवारा का सलाम ऐ वादी-ए-जमील मेंरे दिल की धडकनें आदाब कह रही हैं तेरी बारगाह में तू आज भी है मेरे लिए जन्नत-ए-ख़याल हैं…

एक वाकया

अंधियारी रात के आँगन में ये सुबह के कदमों की आहट ये भीगी-भीगी सर्द हवा, ये हल्की हल्की धुन्धलाहट गाडी में हूँ तनहा महवे-सफ़र और नींद नहीं है आँखों में…

कुछ कत’ए

चन्द कलियाँ निशात की चुनकर मुद्दतों मह्वे-यास रहता हूँ तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ तपते दिल पर यूं गिरती है तेरी नज़र…

कोई किसी से खुश हो

कोई किसी से खुश हो और वो भी बारहा हो यह बात तो ग़लत है रिश्ता लिबास बन कर मैला नहीं हुआ हो यह बात तो ग़लत है वो चाँद…

मुख़ालिफ़

  खुदा ने रंज व ग़म इस लिए हैं बनाए ताकि ख़िलाफ़ उसके खुशी नज़र आए मुख़ालफ़त से सारी चीज़ें होती हैं पैदा कोई नहीं मुख़ालिफ़ उसका वो है छिपा…

मूल के मूल में आ

कब तलक उलटा चलेगा, अब सीधे आ छोड़ कुफ़्र की राह, अब चल दीन की राह इस डंक में देख दवा, और डंक खा अपनी ख़ाहिश के मूल के मूल…

आंसुओं से धुली ख़ुशी की तरह

आंसुओं से धुली ख़ुशी की तरह रिश्ते होते हैं शायरी की तरह जब कभी बादलों में घिरता है चाँद लगता है आदमी की तरह किसी रोज़न किसी दरीचे से सामने…

कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते

कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते किसी की आँख में रहकर संवर गए होते सिंगारदान में रहते हो आईने की तरह किसी के हाथ से गिरकर बिखर गए…

हर जनम में उसी की चाहत थे

हर जनम में उसी की चाहत थे हम किसी और की अमानत थे उसकी आँखों में झिलमिलाती हुई, हम ग़ज़ल की कोई अलामत थे तेरी चादर में तन समेट लिया,…