Tag Archives: khuda

वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिये बनाया है…

गाँधी तो हमारा भोला है, और शेख़ ने बदला चोला है

गाँधी तो हमारा भोला है, और शेख़ ने बदला चोला है देखो तो ख़ुदा क्या करता है, साहब ने भी दफ़्तर खोला है आनर की पहेली बूझी है, हर इक…

ख़ुदा जाने सबा ने क्या कहीं ग़ुंचों के कानों में कि तब सीं देखता हूँ

ख़ुदा जाने सबा ने क्या कहीं ग़ुंचों के कानों में कि तब सीं देखता हूँ अंदलीबों कूँ फ़ुगानों में किया हूँ सैर हुस्न ओ दिल की यक-रंगी का गुलशन में…

गैर क्या जानिये क्यों मुझको बुरा कहते हैं

गैर क्या जानिये क्यों मुझको बुरा कहते हैं आप कहते हैं जो ऐसा तो बज़ा कहते हैं वाकई तेरे इस अन्दाज को क्या कहते हैं ना वफ़ा कहते हैं जिस…

मैं क्या अगर अनफ़ास के सब तार

तो फिर मैं क्या अगर अनफ़ास के सब तार गुम उस में मेरे होने न होने के सभी आसार गुम उस में मेरी आँखों में इक मौसम हमेशा सब्ज़ रहता…

दो सोचें

सुबह जब अख़बार ने मुझसे कहा ज़िन्दगी जीना बहुत दुश्वार है सरहदें फिर शोर-गुल करने लगीं ज़ंग लड़ने के लिए तैयार है दरमियाँ जो था ख़ुदा अब वो कहाँ आदमी…

सुनो पानी में किसकी सदा है 

सुनो पानी में किसकी सदा है कोई दरिया की तह में रो रहा है सवेरे मेरी इन आँखों ने देखा ख़ुदा चारों तरफ़ बिखरा हुआ है समेटो और सीने में…

एक

वो बेमकान, खुदा का नूर जिसके अन्दर है उसको माज़ी, मुस्तक़्बिल व हाल किधर है ? तेरे रिश्ते से है माज़ी और मुस्तक़्बिल वो एक चीज़ है दोनों, तू समझता…

मस्जिद

बेवकूफ़ मस्जिद में जाकर तो झुकते हैं मगर दिल वालों पर वो सितम करते हैं वो बस इमारत है असली हक़ीक़त यहीं है सरवरों के दिल के सिवा मस्जिद नहीं…

मुख़ालिफ़

  खुदा ने रंज व ग़म इस लिए हैं बनाए ताकि ख़िलाफ़ उसके खुशी नज़र आए मुख़ालफ़त से सारी चीज़ें होती हैं पैदा कोई नहीं मुख़ालिफ़ उसका वो है छिपा…

नायाब इल्म

सोने और रुपये से भर जाय जंगल अगर बिना मर्ज़ी ख़ुदा की ले नहीं सकते कंकर सौ किताबें तुम पढ़ो अगर कहीं रुके बिना नुक़्ता ना रहे याद खुदा की…

दुश्वार

हज़रते ईसा से पूछा किसी ने जो था हुशियार इस हस्ती में चीज़ कया है सबसे ज़्यादा दुश्वार बोले ईसा सबसे दुश्वार ग़ुस्सा ख़ुदा का है प्यारे कि जहन्नुम भी…