Tag Archives: khawab

न जाने क्या था

न जाने क्या था, जो कहना था आज मिल के तुझे तुझे मिला था मगर, जाने क्या कहा मैंने वो एक बात जो सोची थी तुझसे कह दूँगा तुझे मिला…

देखो, आहिस्ता चलो

देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना, ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं. काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,…

अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का

अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का याद आता है हमें हाय! ज़माना दिल का तुम भी मुँह चूम लो बेसाख़ता प्यार आ जाए मैं सुनाऊँ जो कभी…

शब, हाथ हमारे जो मये-नाब न आई

शब, हाथ हमारे जो मये-नाब न आई कैफियते-शे‘रे शबे-महताब न आई सहरा में घटाघोर पे, हम बादकशों की कब आई कि बा-दीदा-ए-पुरआब न आई जो मुल्के-अदम से नहीं आया कोई हमदम क्या याद उसे सोहबते-अहबाब न आई…

हस्ती अपनी हुबाब की सी है ।

हस्ती अपनी हुबाब की सी है । ये नुमाइश सराब की सी है ।। नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए, हर एक पंखुड़ी गुलाब की सी है । चश्म-ए-दिल…

मेरा दोस्त मेरा हमनवा

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ मेरी नज़र में वो…