Tag Archives: jindagi

फिर हरीफ़े-बहार हो बैठे जाने किस-किस को आज रो बैठे

फिर हरीफ़े-बहार हो बैठे जाने किस-किस को आज रो बैठे थी मगर इतनी रायगाँ भी न थी आज कुछ ज़िन्दगी से खो बैठे तेरे दर तक पहुँच के लौट आए…

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने में और जाम टूटेंगे, इस शराबख़ाने में मौसमों के आने में, मौसमों के जाने में हर…

शोलए गुल, गुलाबे शोला क्या आग और फूल का ये रिश्ता क्या

शोलए गुल, गुलाबे शोला क्या आग और फूल का ये रिश्ता क्या तुम मिरी ज़िन्दगी हो ये सच है ज़िन्दगी का मगर भरोसा क्या कितनी सदियों की क़िस्मतों का अमीं…

गुलों की तरह हमने ज़िन्दगी को इस क़दर जाना

गुलों की तरह हमने ज़िन्दगी को इस क़दर जाना किसी की ज़ुल्फ़ में एक रात सोना और बिखर जाना अगर ऐसे गये तो ज़िन्दगी पर हर्फ़ आयेगा हवाओं से लिपटना,…

आया ही नहीं हमको आहिस्ता गुज़र जाना शीशे का मुक़द्दर है

आया ही नहीं हमको आहिस्ता गुज़र जाना शीशे का मुक़द्दर है टकरा के बिखर जाना तारों की तरह शब के सीने में उतर जाना आहट न हो क़दमों की इस…

फूल सा कुछ कलाम और सही एक ग़ज़ल उस के नाम और सही

फूल सा कुछ कलाम और सही एक ग़ज़ल उस के नाम और सही उस की ज़ुल्फ़ें बहुत घनेरी हैं एक शब का क़याम और सही ज़िन्दगी के उदास क़िस्से में…

तेरे आने की महफ़िल ने जो कुछ आहट-सी पाई है

तेरे आने की महफ़िल ने जो कुछ आहट-सी पाई है, हर इक ने साफ़ देखा शमअ की लौ थरथराई है. तपाक और मुस्कराहट में भी आँसू थरथराते हैं, निशाते-दीद भी…

रुकी-रुकी सी शबे-मर्ग खत्म

रुकी-रुकी सी शबे-मर्ग खत्म पर आई. वो पौ फटी,वो नई ज़िन्दगी नज़र आई. ये मोड़ वो हैं कि परछाइयाँ देगी न साथ. मुसाफ़िरों से कहो, उसकी रहगुज़र आई. फ़ज़ा तबस्सुमे-सुबह-बहार…

वुसअते-बेकराँ में खो जायें

वुसअते-बेकराँ में खो जायें. आसमानों के राज़ हो जायें. क्या अजब तेरे चंद तर दामन. सबके दागे-गुनाह धो जायें. शादो-नाशाद हर तरह के हैं लोग. किस पे हँस जायें,किस पे…

सोज़े-पिनहाँ हो,चश्मे-पुरनम हो

सोज़े-पिनहाँ हो,चश्मे-पुरनम हो. दिल में अच्छा-बुरा कोई ग़म हो. फिर से तरतीब दें ज़माने को. ऐ ग़में ज़िन्दगी मुनज़्ज़म हो. इन्किलाब आ ही जाएगा इक रोज़. और नज़्में-हयात बरहम हो.…

ना जाना आज तक क्या शै खुशी है

ना जाना आज तक क्या शै खुशी है हमारी ज़िन्दगी भी ज़िन्दगी है तेरे गम से शिकायत सी रही है मुझे सचमुच बडी शर्मिन्दगी है मोहब्बत में कभी सोचा है…

मौत इक गीत रात गाती थी

मौत इक गीत रात गाती थी ज़िन्दगी झूम झूम जाती थी कभी दीवाने रो भी पडते थे कभी तेरी भी याद आती थी किसके मातम में चांद तारों से रात…