Tag Archives: jindagi

दो सोचें

सुबह जब अख़बार ने मुझसे कहा ज़िन्दगी जीना बहुत दुश्वार है सरहदें फिर शोर-गुल करने लगीं ज़ंग लड़ने के लिए तैयार है दरमियाँ जो था ख़ुदा अब वो कहाँ आदमी…

मन बैरागी, तन अनुरागी

मन बैरागी, तन अनुरागी, कदम-कदम दुशवारी है जीवन जीना सहल न जानो बहुत बड़ी फनकारी है औरों जैसे होकर भी हम बा-इज़्ज़त हैं बस्ती में कुछ लोगों का सीधापन है,…

ख़ुश्बू को तितलियों के परों में छिपाऊँगा

ख़ुश्बू को तितलियों के परों में छिपाऊँगा फिर नीले-नीले बादलों में लौट जाऊँगा सोने के फूल-पत्ते गिरेंगे ज़मीन पर मैं ज़र्द-ज़र्द शाख़ों पे जब गुनगुनाऊँगा घुल जायेंगी बदन पे जमी…

सर से चादर बदन से क़बा ले गई

सर से चादर बदन से क़बा ले गई ज़िन्दगी हम फ़क़ीरों से क्या ले गई मेरी मुठ्ठी में सूखे हुए फूल हैं ख़ुशबुओं को उड़ा कर हवा ले गई मैं…

एक चेहरा साथ-साथ रहा जो मिला नहीं 

एक चेहरा साथ-साथ रहा जो मिला नहीं किसको तलाश करते रहे कुछ पता नहीं शिद्दत की धूप तेज़ हवाओं के बावजूद मैं शाख़ से गिरा हूँ नज़र से गिरा नहीं…

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता न मज़ा है दुश्मनी में न है लुत्फ़ दोस्ती में कोई ग़ैर ग़ैर होता कोई…

एक बूढ़ा नहीफ़-ओ-खस्ता दराज़ 

एक बूढ़ा नहीफ़-ओ-खस्ता दराज़ इक ज़रूरत से जाता था बाज़ार ज़ोफ-ए-पीरी से खम हुई थी कमर राह बेचारा चलता था रुक कर चन्द लड़कों को उस पे आई हँसी क़द…