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मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया

मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया बरबादियों का सोग़ मनाना फ़ुजूल था बरबादियों का जश्न मनाता चला गया जो मिल गया…

नज़रे-कालिज

ऐ सरज़मीन-ए-पाक़ के यारां-ए-नेक नाम बा-सद-खलूस शायर-ए-आवारा का सलाम ऐ वादी-ए-जमील मेंरे दिल की धडकनें आदाब कह रही हैं तेरी बारगाह में तू आज भी है मेरे लिए जन्नत-ए-ख़याल हैं…

शाहकार

मुसव्विर मैं तेरा शाहकार वापस करने आया हूं अब इन रंगीन रुख़सारों में थोड़ी ज़िदर्यां भर दे हिजाब आलूद नज़रों में ज़रा बेबाकियां भर दे लबों की भीगी भीगी सिलवटों…

आज

साथियो! मैंने बरसों तुम्हारे लिए चाँद, तारों, बहारों के सपने बुने हुस्न और इश्क़ के गीत गाता रहा आरज़ूओं के ऐवां सजाता रहा मैं तुम्हारा मुगन्नी, तुम्हारे लिए जब भी आया…

एक मुट्ठी एक सहरा भेज दे

एक मुट्ठी एक सहरा भेज दे कोई आँधी मेरा हिस्सा भेज दे ज़िन्दगी बच्ची है इस का दिल न तोड़ ख़्वाब की नन्ही से गुड़िया भेज दे अक्स ख़ाका धुँद…

इकीसवीं सदी

दुःख सुख था एक सबका अपना हो या बेगाना एक वो भी था ज़माना, एक ये भी है ज़माना दादा हैं आते थे जब, मिटटी का एक घर था चोरों…

दो सोचें

सुबह जब अख़बार ने मुझसे कहा ज़िन्दगी जीना बहुत दुश्वार है सरहदें फिर शोर-गुल करने लगीं ज़ंग लड़ने के लिए तैयार है दरमियाँ जो था ख़ुदा अब वो कहाँ आदमी…

मन बैरागी, तन अनुरागी

मन बैरागी, तन अनुरागी, कदम-कदम दुशवारी है जीवन जीना सहल न जानो बहुत बड़ी फनकारी है औरों जैसे होकर भी हम बा-इज़्ज़त हैं बस्ती में कुछ लोगों का सीधापन है,…

ख़ुश्बू को तितलियों के परों में छिपाऊँगा

ख़ुश्बू को तितलियों के परों में छिपाऊँगा फिर नीले-नीले बादलों में लौट जाऊँगा सोने के फूल-पत्ते गिरेंगे ज़मीन पर मैं ज़र्द-ज़र्द शाख़ों पे जब गुनगुनाऊँगा घुल जायेंगी बदन पे जमी…

सर से चादर बदन से क़बा ले गई

सर से चादर बदन से क़बा ले गई ज़िन्दगी हम फ़क़ीरों से क्या ले गई मेरी मुठ्ठी में सूखे हुए फूल हैं ख़ुशबुओं को उड़ा कर हवा ले गई मैं…

एक चेहरा साथ-साथ रहा जो मिला नहीं 

एक चेहरा साथ-साथ रहा जो मिला नहीं किसको तलाश करते रहे कुछ पता नहीं शिद्दत की धूप तेज़ हवाओं के बावजूद मैं शाख़ से गिरा हूँ नज़र से गिरा नहीं…