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तारों के चिलमनों से कोई झांकता भी हो 

तारों के चिलमनों से कोई झांकता भी हो इस कायनात में कोई मंज़र नया भी हो इतनी सियाह रात में किसको सदायें दूँ ऐसा चिराग़ दे जो कभी बोलता भी…

ग़ज़ब किया, तेरे वादे पे ऐतबार किया

ग़ज़ब किया, तेरे वादे पे ऐतबार किया तमाम रात क़यामत का इन्तज़ार किया हंसा हंसा के शब-ए-वस्ल अश्क-बार किया तसल्लिया मुझे दे-दे के बेकरार किया हम ऐसे मह्व-ए-नज़ारा न थे…

लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में 

लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में किस की बनी है आलम-ए-नापायेदार में बुलबुल को बागबां से न सैय्याद से गिला किस्मत में कैद थी लिखी फ़स्ले बहार में…

आँखों मैं इंतजार है तेरा

आँखों मैं इंतजार है तेरा सच्चा है या झूठा पर प्यार है तेरा वादों पे तेरे यकीन मुझे अब तक माना किसी को ऐतबार नहीं तेरा   सो जन्मो  की…