Tag Archives: intjaar

तिरी उमीद, तिरा इंतज़ार जब से है

तिरी उमीद, तिरा इंतज़ार जब से है न शब को दिन से शिकायत न दिन को शब से है किसी का दर्द हो करते हैं तेरे नाम रक़म गिला है…

रविश-रविश है वही इंतज़ार का मौसम नहीं है कोई भी मौसम, बहार का मौसम

रविश-रविश है वही इंतज़ार का मौसम नहीं है कोई भी मौसम, बहार का मौसम गरां है दिल पे ग़मे-रोज़गार का मौसम है आज़मायशे-हुसने-निगार का मौसम ख़ुशा नज़ारा-ए-रुख़सारे-यार की साअत ख़ुशा…

इश्क़ मिन्नतकशे-क़रार नहीं हुस्न मज़बूरे-इंतज़ार नहीं

इश्क़ मिन्नतकशे-क़रार नहीं हुस्न मज़बूरे-इंतज़ार नहीं तेरी रंजिश की इंतिहा मालूम हसरतों का मिरी शुमार नहीं अपनी नज़रें बिखेर दे साक़ी मय ब‍अंदाज़ः-ए-ख़ुमार नहीं ज़ेरे-लब है अभी तबस्सुमे-दोस्त मुन्तशिर जल्वः-ए-बहार…

हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए काफ़िरों की नमाज़ हो जाए

हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए काफ़िरों की नमाज़ हो जाए दिल रहीने-नियाज़ हो जाए बेकसी कारसाज़ हो जाए मिन्नते-चाराःसाज़ कौन करे दर्द जब जाँ-नवाज़ हो जाए इश्क़ दिल में रहे…

खाली कागज़

खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो? एक ख़ामोश-सा जवाब तो है। डाक से आया है तो कुछ कहा होगा “कोई वादा नहीं… लेकिन देखें कल वक्त क्या तहरीर करता…

तारों के चिलमनों से कोई झांकता भी हो 

तारों के चिलमनों से कोई झांकता भी हो इस कायनात में कोई मंज़र नया भी हो इतनी सियाह रात में किसको सदायें दूँ ऐसा चिराग़ दे जो कभी बोलता भी…

ग़ज़ब किया, तेरे वादे पे ऐतबार किया

ग़ज़ब किया, तेरे वादे पे ऐतबार किया तमाम रात क़यामत का इन्तज़ार किया हंसा हंसा के शब-ए-वस्ल अश्क-बार किया तसल्लिया मुझे दे-दे के बेकरार किया हम ऐसे मह्व-ए-नज़ारा न थे…

लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में 

लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में किस की बनी है आलम-ए-नापायेदार में बुलबुल को बागबां से न सैय्याद से गिला किस्मत में कैद थी लिखी फ़स्ले बहार में…

आँखों मैं इंतजार है तेरा

आँखों मैं इंतजार है तेरा सच्चा है या झूठा पर प्यार है तेरा वादों पे तेरे यकीन मुझे अब तक माना किसी को ऐतबार नहीं तेरा   सो जन्मो  की…