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गुलाबी गाल तेरे

गुलाबी गाल तेरे जब देख पाते हैं होके खुशगवार पत्थरों में राह पाते हैं इक बार घूँघट ज़रा फिर से हटा दो दंग होने का दीवानों को मज़ा दो ताकि…

हमारे सुरसाज़

  चाहे तोड़ दो हमारे साज़ अय मुल्ला साज़ हमारे पास हजारों और भी हैं इश्क़ के पन्जों में हम गिर गए जो क्या फ़िक्र जो बाजे-बन्सी कम हुए हैं…

मैं ग़ज़ल कहूँ मैं ग़ज़ल पढूँ, मुझे दे तो हुस्न-ए-ख़्याल दे 

मैं ग़ज़ल कहूँ मैं ग़ज़ल पढूँ, मुझे दे तो हुस्न-ए-ख़्याल दे तिरा ग़म ही मेरी तरबियत, मुझे दे तो रंज-ए-मलाल दे सभी चार दिन की हैं चांदनी, ये रियासतें ये…

हुस्न-ए-अदा भी खूबी-ए-सीरत में चाहिए,

हुस्न-ए-अदा भी खूबी-ए-सीरत में चाहिए, यह बढ़ती दौलत, ऐसी ही दौलत में चाहिए। आ जाए राह-ए-रास्त पर काफ़िर तेरा मिज़ाज, इक बंदा-ए-ख़ुदा तेरी ख़िदमत में चाहिए । देखे कुछ उनके…

ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा

ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा दिल के जाने का निहायत ग़म रहा दिल न पहुँचा गोशा-ए-दामन तलक क़तरा-ए-ख़ूँ था मिज़्हा  पे जम रहा जामा-ए-अहराम-ए-जाहिद पर न जा था…