Tag Archives: husn

हमने सब शे’र में सँवारे थे हमसे जितने सुख़न तुम्हारे थे

हमने सब शे’र में सँवारे थे हमसे जितने सुख़न तुम्हारे थे रंगों ख़ुश्बू के, हुस्नो-ख़ूबी के तुमसे थे जितने इस्तिआरे थे तेरे क़ौलो-क़रार से पहले अपने कुछ और भी सहारे…

बिसाते-रक़्स पे साद शर्क़ो-गरब से सरे शाम

बिसाते-रक़्स पे साद शर्क़ो-गरब से सरे शाम दमक रहा है तेरी दोस्ती का माहे-तमाम छलक रही है तेरे हुस्ने-मेहरबाँ की शराब भरा हुआ है लबालब हर एक निगाह का जाम…

सलाम लिखता है शायर तुम्हारे हुस्न के नाम

सलाम लिखता है शायर तुम्हारे हुस्न के नाम बिखर गया जो कभी रंगे-पैरहन सरे-बाम निखर गयी है कभी सुबह, दोपहर, कभी शाम कहीं जो कामते-ज़ेबा पे सज गई है कबा…

तेरी सूरत जो दिलनशीं की है आशन: शक्ल हर हँसी की है

तेरी सूरत जो दिलनशीं की है आशन: शक्ल हर हँसी की है हुस्न से दिल लगाके हस्ती की हर घड़ी हमने आतशीं की है सुब्‍हे-गुल हो कि शामे-मयख़ान: मदह उस…

एक अफ़सुरदा शाहराह है दराज़ दूर

एक अफ़सुरदा शाहराह है दराज़ दूर उफ़क पर नज़र जमाये हुए सर्द मिट्टी के अपने सीने के सुरमगी हुस्न को बिछाये हुए जिस तरह कोई ग़मज़दा औरत अपने वीरांकदे में…

आ, के वाबस्तः हैं उस हुस्न की यादें तुझ से

  आ, के वाबस्तः हैं उस हुस्न की यादें तुझ से जिसने इस दिल को परीखानः बना रखा था जिसकी उल्फ़त में भुला रखी थी दुनिया हमने दह्र को दह्र…

हुस्न-मरहूने-जोशे-बादः-ए-नाज़ इश्क़ मिन्नतकशे-फ़ुसूने-नियाज़

हुस्न-मरहूने-जोशे-बादः-ए-नाज़ इश्क़ मिन्नतकशे-फ़ुसूने-नियाज़ दिल का हर तार लरज़िशे-पैहम जाँ का हर रिश्तः वक़्फ़े-सोज़ो-गुदाज़ सोज़िशे-दर्दे-दिल-किसे मालूम कौन जाने किसी के इश्क़ का राज़ मेरी ख़ामोशियों में लरज़ाँ है मेरे नालों की…

जिस ने तुझ हुस्न पर निगाह किया नूर-ए-ख़ुर्शीद फ़र्श-ए-राह किया

जिस ने तुझ हुस्न पर निगाह किया नूर-ए-ख़ुर्शीद फ़र्श-ए-राह किया हक़ ने अपने करम सती मुज कूँ मुल्क-ए-ख़ूबी का पादशाह किया मश्‍क-ए-ग़फ़लत से तीरा-बातिन ने सफ़्हा-ए-ज़िंदगी सियाह किया हौज़-ए-कौसर का…

हुस्न का जादू जगाए इक ज़माना हो गया

हुस्न का जादू जगाए इक ज़माना हो गया. ऐ सुकूते-शामे-ग़म फिर छेड़ उन आँखों की बात. ज़िन्दगी को ज़िन्दगी करना कोई आसाँ न था. हज़्म करके ज़हर को करना पड़ा…

अगर बदल न दिया आदमी ने दुनियाँ को

अगर बदल न दिया आदमी ने दुनियाँ को, तो जान लो कि यहाँ आदमी कि खैर नहीं. हर इन्किलाब के बाद आदमी समझता है, कि इसके बाद न फिर लेगी…

कर गई काम वो नज़र, गो उसे आज देखकर

कर गई काम वो नज़र, गो उसे आज देखकर. दर्द भी उठ सका नहीं,रंग भी उड़ सका नहीं. तेरी कशीदगी में आज शाने-सुपुर्दगी भी है. हुस्न के वश में क्या…

किसी का यूं तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी

किसी का यूं तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी ये हुस्न-ओ-इश्क़ तो धोका है सब, मगर फिर भी हजार बार ज़माना इधर से गुजरा नई नई है मगर कुछ…