Tag Archives: ghar

उदासी आसमाँ है

उदासी आसमाँ है दिल मेरा कितना अकेला है परिंदा शाम के पुल पर बहुत ख़ामोश बैठा है मैं जब सो जाऊं इन आँखों पे अपने होंठ रख देना यकीं आ…

सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है 

सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है बावज़ू हो के भी छूते हुए डर लगता है मैं तिरे साथ सितारों से गुज़र सकता हूँ कितना आसान मोहब्बत का…

अब किसे चाहें किसे ढूँढा करें

अब किसे चाहें किसे ढूँढा करें वो भी आख़िर मिल गया अब क्या करें हल्की-हल्की बारिशें होती रहें हम भी फूलों की तरह भीगा करें आँख मूँदे उस गुलाबी धूप…

सन्नाटा क्या चुपके-चुपके कहता है

सन्नाटा क्या चुपके-चुपके कहता है सारी दुनिया किसका रैन-बसेरा है आसमान के दोनों कोनों के आख़िर एक सितारा तेरा है, इक मेरा है अंडा मछली छूकर जिनको पाप लगे उनका…

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने में और जाम टूटेंगे, इस शराबख़ाने में मौसमों के आने में, मौसमों के जाने में हर…

आना तुम

आना तुम मेरे घर अधरों पर हास लिये तन-मन की धरती पर झर-झर-झर-झर-झरना साँसों मे प्रश्नों का आकुल आकाश लिये तुमको पथ में कुछ मर्यादाएँ रोकेंगी जानी-अनजानी सौ बाधाएँ रोकेंगी…