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बिन मेरे

  इक सफर पर मैं रहा, बिन मेरे उस जगह दिल खुल गया, बिन मेरे वो चाँद जो मुझ से छिप गया पूरा रुख़ पर रुख़ रख कर मेरे, बिन…

कोई लश्कर है कि बढ़ते हुए ग़म आते हैं 

कोई लश्कर है कि बढ़ते हुए ग़म आते हैं शाम के साए बहुत तेज़ क़दम आते हैं दिल वो दरवेश है जो आँख उठाता ही नहीं इसके दरवाजे पे सौ…

कोई हाथ नहीं ख़ाली है

कोई हाथ नहीं ख़ाली है बाबा ये नगरी कैसी है कोई किसी का दर्द न जाने सबको अपनी अपनी पड़ी है उसका भी कुछ हक़ है आख़िर उसने मुझसे नफ़रत…

ग़म से कहीं नजात मिले चैन पाए हम

ग़म से कहीं नजात मिले चैन पाए हम दिल ख़ूँ में नहाए तो गंगा नहाए हम जन्नत में जाए हम कि जहन्नुम में जाए हम मिल जाए तू कहीं न…

होते होते चश्म से आज अश्क-बरी रह गई

होते होते चश्म से आज अश्क-बरी रह गई आबरू बारे तेरी अब्र-ए-बहारी रह गई. आते आते इस तरफ़ उन की सवारी रह गई दिल की दिल में आरज़ू-ए-जाँ-निसारी रह गई.…

रात भर मुझको गम-ए-यार ने सोने न दिया

रात भर मुझको गम-ए-यार ने सोने न दिया सुबह को खौफे शबे तार न सोने न दिया शम्अ की तरह मुझे रात कटी सूली पर चैन से यादे कदे यार…

ऐश से गुजरी कि गम के साथ, अच्छी निभ गई

ऐश से गुजरी कि गम के साथ, अच्छी निभ गई निभ गई जो उस सनम के साथ, अच्छी निभ गई दोस्ती उस दुश्मने-जां ने निबाही तो सही जो निभी जुल्मो-सितम…

ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा

ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा दिल के जाने का निहायत ग़म रहा दिल न पहुँचा गोशा-ए-दामन तलक क़तरा-ए-ख़ूँ था मिज़्हा  पे जम रहा जामा-ए-अहराम-ए-जाहिद पर न जा था…