Tag Archives: dua

सियाहियों के बने हर्फ़-हर्फ़ धोते हैं

सियाहियों के बने हर्फ़-हर्फ़ धोते हैं ये लोग रात में काग़ज़ कहाँ भिगोते हैं किसी की राह में दहलीज़ पर दिया न रखो किवाड़ सूखी हुई लकड़ियों के होते हैं…

चमक रही है परों में उड़ान की ख़ुश्बू

चमक रही है परों में उड़ान की ख़ुश्बू बुला रही है बहुत आसमान की ख़ुश्बू भटक रही है पुरानी दुलाइयाँ ओढे हवेलियों में मेरे ख़ानदान की ख़ुश्बू सुनाके कोई कहानी…

तारों के चिलमनों से कोई झांकता भी हो 

तारों के चिलमनों से कोई झांकता भी हो इस कायनात में कोई मंज़र नया भी हो इतनी सियाह रात में किसको सदायें दूँ ऐसा चिराग़ दे जो कभी बोलता भी…

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में, कि मेरी नज़र को ख़बर न हो मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर न हो वो बड़ा रहीमो-करीम है, मुझे…

फिर शब-ए-ग़म ने मुझे शक्ल दिखाई क्योंकर

फिर शब-ए-ग़म ने मुझे शक्ल दिखाई क्योंकर ये बला घर से निकाली हुई आई क्योंकर तू ने की ग़ैर से मेरी बुराई क्योंकर गर् न थी दिल में तो लब…