Tag Archives: diwana

अगर कुछ होश हम रखते तो मस्ताने हुए होते

अगर कुछ होश हम रखते तो मस्ताने हुए होते पहुँचते जा लब-ए-साक़ी कूँ पैमाने हुए होते अबस इन शहरियों में वक्‍त अपना हम किए ज़ाए किसी मजनूँ की सोहबत बैठ…

दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना

दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना जहाँ नहीं चैना वहाँ नहीं रहना दुखी मन… दर्द हमारा कोई न जाने अपनी गरज के सब हैं दीवाने किसके आगे रोना रोएं देस…

इक दम में जर्बे-नाला से पत्थर को तोड़ दूं

इक दम में जर्बे-नाला से पत्थर को तोड़ दूं पत्थर तो क्या, किसी सद्दे-सिकन्दर को तोड़ दूं खूने-जिगर से लाल का भी मोल दूं बहा गर आंसुओं से कीमते-गौहर को…

या मुझे अफसरे-शाहाना बनाया होता

या मुझे अफसरे-शाहाना बनाया होता या मुझे ताज-गदायाना बनाया होता खाकसारी के लिए गरचे बनाया था मुझे काश, खाके-दरे-जनाना बनाया होता नशा-ए-इश्क का गर जर्फ दिया था मुझको उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता…

समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का

समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का ‘अकबर’ ये ग़ज़ल मेरी है अफ़साना किसी का गर शैख़-ओ-बहरमन सुनें अफ़साना किसी का माबद न रहे काबा-ओ-बुतख़ाना किसी का अल्लाह ने दी है जो…

कोई दीवाना कहता है

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !! मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ! ये तेरा…