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इक दम में जर्बे-नाला से पत्थर को तोड़ दूं

इक दम में जर्बे-नाला से पत्थर को तोड़ दूं पत्थर तो क्या, किसी सद्दे-सिकन्दर को तोड़ दूं खूने-जिगर से लाल का भी मोल दूं बहा गर आंसुओं से कीमते-गौहर को…

या मुझे अफसरे-शाहाना बनाया होता

या मुझे अफसरे-शाहाना बनाया होता या मुझे ताज-गदायाना बनाया होता खाकसारी के लिए गरचे बनाया था मुझे काश, खाके-दरे-जनाना बनाया होता नशा-ए-इश्क का गर जर्फ दिया था मुझको उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता…

समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का

समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का ‘अकबर’ ये ग़ज़ल मेरी है अफ़साना किसी का गर शैख़-ओ-बहरमन सुनें अफ़साना किसी का माबद न रहे काबा-ओ-बुतख़ाना किसी का अल्लाह ने दी है जो…

कोई दीवाना कहता है

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !! मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ! ये तेरा…