Tag Archives: dil

सिखा देती है चलना ठोकरें

सिखा देती है चलना ठोकरें भी राहगीरों को कोई रास्ता सदा दुशवार हो ऐसा नहीं होता कहीं तो कोई होगा जिसको अपनी भी ज़रूरत हो हरेक बाज़ी में दिल की…

जब भी दिल ने दिल को सदा दी

जब भी दिल ने दिल को सदा दी सन्नाटों में आग लगा दी… मिट्टी तेरी, पानी तेरा जैसी चाही शक्ल बना दी छोटा लगता था अफ्साना मैंने तेरी बात बढ़ा…

सब्ज़ पत्ते धूप की ये आग जब पी जाएँगे

सब्ज़ पत्ते धूप की ये आग जब पी जाएँगे उजले फर के कोट पहने हल्के जाड़े आएँगे गीले-गीले मंदिरों में बाल खोले देवियाँ सोचती हैं उनके सूरज देवता कब आएँगे…

मस्जिद

बेवकूफ़ मस्जिद में जाकर तो झुकते हैं मगर दिल वालों पर वो सितम करते हैं वो बस इमारत है असली हक़ीक़त यहीं है सरवरों के दिल के सिवा मस्जिद नहीं…

हम को मन की शक्ति देना

हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करें दूसरो की जय से पहले, ख़ुद को जय करें। भेद भाव अपने दिल से साफ कर सकें दोस्तों से भूल हो…

तौबा 1

  तन मेरा और रग मेरी तुम से भरी हुईं है तौबा को रखने की मुझ में जगह नहीं है तो तय है कि तौबा को दिल से निकाल दूं…

अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए

अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए जिस्म मिट जाए कि अब जान फ़ना हो जाए गैर-मुमकिन है… जिस घड़ी…

सुला चुकी थी ये दुनिया मुझे

सुला चुकी थी ये दुनिया थपक थपक के मुझे जगा दिया तेरी पाज़ेब ने खनक के मुझे कोई बताये के मैं इसका क्या इलाज करूँ परेशां करता है ये दिल…

वफ़ा को आज़माना चाहिए था

वफ़ा को आज़माना चाहिए था, हमारा दिल दुखाना चाहिए था आना न आना मेरी मर्ज़ी है, तुमको तो बुलाना चाहिए था हमारी ख्वाहिश एक घर की थी, उसे सारा ज़माना…

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं चाँद पागल हैं अंधेरे में निकल पड़ता हैं मैं समंदर हूँ कुल्हाड़ी से नहीं कट सकता कोई फव्वारा नही हूँ जो उबल…

दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें

दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें जानेवाली चीज़ का ग़म क्या करें पूरे होंगे अपने अरमां किस तरह शौक़ बेहद वक्त है कम क्या करें बक्श दें प्यार…

सियाहियों के बने हर्फ़-हर्फ़ धोते हैं

सियाहियों के बने हर्फ़-हर्फ़ धोते हैं ये लोग रात में काग़ज़ कहाँ भिगोते हैं किसी की राह में दहलीज़ पर दिया न रखो किवाड़ सूखी हुई लकड़ियों के होते हैं…