Tag Archives: dil

जिस्म छूती है जब आ आ के पवन बारिश में

जिस्म छूती है जब आ आ के पवन बारिश में और बढ़ जाती है कुछ दिल की जलन बारिश में मेरे अतराफ़ छ्लक पड़ती हैं मीठी झीलें जब नहाता है…

जब मेरी याद सताए तो मुझे ख़त लिखना

जब मेरी याद सताए तो मुझे ख़त लिखना । तुम को जब नींद न आए तो मुझे ख़त लिखना ।। नीले पेड़ों की घनी छाँव में हँसता सावन, प्यासी धरती…

क्या उम्मीद करे हम उन से जिनको वफ़ा मालूम नहीं

क्या उम्मीद करे हम उन से जिनको वफ़ा मालूम नहीं ग़म देना मालूम है लेकिन ग़म की दवा मालूम नहीं जिन की गली में उम्र गँवा दी जीवन भर हैरान…

सिखा देती है चलना ठोकरें

सिखा देती है चलना ठोकरें भी राहगीरों को कोई रास्ता सदा दुशवार हो ऐसा नहीं होता कहीं तो कोई होगा जिसको अपनी भी ज़रूरत हो हरेक बाज़ी में दिल की…

जब भी दिल ने दिल को सदा दी

जब भी दिल ने दिल को सदा दी सन्नाटों में आग लगा दी… मिट्टी तेरी, पानी तेरा जैसी चाही शक्ल बना दी छोटा लगता था अफ्साना मैंने तेरी बात बढ़ा…

सब्ज़ पत्ते धूप की ये आग जब पी जाएँगे

सब्ज़ पत्ते धूप की ये आग जब पी जाएँगे उजले फर के कोट पहने हल्के जाड़े आएँगे गीले-गीले मंदिरों में बाल खोले देवियाँ सोचती हैं उनके सूरज देवता कब आएँगे…

मस्जिद

बेवकूफ़ मस्जिद में जाकर तो झुकते हैं मगर दिल वालों पर वो सितम करते हैं वो बस इमारत है असली हक़ीक़त यहीं है सरवरों के दिल के सिवा मस्जिद नहीं…

हम को मन की शक्ति देना

हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करें दूसरो की जय से पहले, ख़ुद को जय करें। भेद भाव अपने दिल से साफ कर सकें दोस्तों से भूल हो…

तौबा 1

  तन मेरा और रग मेरी तुम से भरी हुईं है तौबा को रखने की मुझ में जगह नहीं है तो तय है कि तौबा को दिल से निकाल दूं…

अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए

अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए जिस्म मिट जाए कि अब जान फ़ना हो जाए गैर-मुमकिन है… जिस घड़ी…

सुला चुकी थी ये दुनिया मुझे

सुला चुकी थी ये दुनिया थपक थपक के मुझे जगा दिया तेरी पाज़ेब ने खनक के मुझे कोई बताये के मैं इसका क्या इलाज करूँ परेशां करता है ये दिल…

वफ़ा को आज़माना चाहिए था

वफ़ा को आज़माना चाहिए था, हमारा दिल दुखाना चाहिए था आना न आना मेरी मर्ज़ी है, तुमको तो बुलाना चाहिए था हमारी ख्वाहिश एक घर की थी, उसे सारा ज़माना…