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दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें

दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें जानेवाली चीज़ का ग़म क्या करें पूरे होंगे अपने अरमां किस तरह शौक़ बेहद वक्त है कम क्या करें बक्श दें प्यार…

सियाहियों के बने हर्फ़-हर्फ़ धोते हैं

सियाहियों के बने हर्फ़-हर्फ़ धोते हैं ये लोग रात में काग़ज़ कहाँ भिगोते हैं किसी की राह में दहलीज़ पर दिया न रखो किवाड़ सूखी हुई लकड़ियों के होते हैं…

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया जिसको गले लगा लिया वो दूर हो गया कागज में दब के मर गए कीड़े किताब के दीवाना बे पढ़े-लिखे मशहूर हो गया…

उदासी आसमाँ है

उदासी आसमाँ है दिल मेरा कितना अकेला है परिंदा शाम के पुल पर बहुत ख़ामोश बैठा है मैं जब सो जाऊं इन आँखों पे अपने होंठ रख देना यकीं आ…

उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता 

उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता हज़ारों जुगनुओं से भी अँधेरा कम नहीं होता कभी बरसात में शादाब बेलें सूख जाती हैं हरे पेड़ों के गिरने का…

होंठों पे मुहब्बत के फ़साने नहीं आते

होंठों पे मुहब्बत के फ़साने नहीं आते साहिल पे समुंदर के ख़ज़ाने नहीं आते पलकें भी चमक उठती हैं सोते में हमारी आँखों को अभी ख़्वाब छुपाने नहीं आते दिल…

सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है 

सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है बावज़ू हो के भी छूते हुए डर लगता है मैं तिरे साथ सितारों से गुज़र सकता हूँ कितना आसान मोहब्बत का…

किसे ख़बर थी तुझे इस तरह सजाऊंगा

किसे ख़बर थी तुझे इस तरह सजाऊंगा ज़माना देखेगा और मैं न देख पाऊंगा हयातों मौत फ़िराक़ों विसाल सब यकजा मैं एक रात में कितने दीये जलाऊंगा पला बढ़ा हूँ…

कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते

कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते किसी की आँख में रहकर संवर गए होते सिंगारदान में रहते हो आईने की तरह किसी के हाथ से गिरकर बिखर गए…

मेरे दिल की राख कुरेद मत

मेरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्करा के हवा न दे ये चराग़ फिर भी चराग़ है कहीं तेरा हाथ जला न दे मैं उदासियाँ न सजा सकूँ कभी…

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे और इस दिल की तरफ़ बरसे तो पत्थर बरसे बारिशें छत पे खुली जगहों पे होती हैं मगर ग़म वो सावन है जो…

अब किसे चाहें किसे ढूँढा करें

अब किसे चाहें किसे ढूँढा करें वो भी आख़िर मिल गया अब क्या करें हल्की-हल्की बारिशें होती रहें हम भी फूलों की तरह भीगा करें आँख मूँदे उस गुलाबी धूप…