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ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं

लता: ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें तसव्वुर में कोई बसता नहीं, हम क्या करें तुम्ही…

निगाहें मिलाने को जी चाहता है

राज़ की बात है मेहफ़िल में कहें या न कहें बस गया है कोई इस दिल में कहें या न कहें कहें या न कहें निगाहें मिलाने को जी चाहता…

दिल में किसी के प्यार का

दिल में किसी के प्यार का जलता हुआ दिया दुनिया की आँधियों से भला ये बुझेगा क्या साँसों की आँच पा के भड़कता रहेगा ये सीने में दिल के साथ…

दिल कहे रुक जा रे रुक जा,

दिल कहे रुक जा रे रुक जा, यहीं पे कहीं जो बात जो बात इस जगह, है कहीं पे नहीं पर्बत ऊपर खिड़की खूले, झाँके सुन्दर भोर, चले पवन सुहानी…

तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती नज़ारे हम क्या देखें

तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती नज़ारे हम क्या देखें तुझे मिलके भी प्यास नहीं घटती नज़ारे हम क्या देखें पिघले बदन तेरे तपती निगाहों से शोलों की आँच आए…

तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं

तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी अब अगर मेल नहीं है तो जुदाई भी नहीं बात तोड़ी भी नहीं…

शिकस्त

अपने सीने से लगाये हुये उम्मीद की लाश मुद्दतों ज़ीस्त को नाशाद किया है मैनें तूने तो एक ही सदमे से किया था दो चार दिल को हर तरह से…

सरज़मीने-यास

जीने से दिल बेज़ार है हर सांस एक आज़ार है कितनी हज़ीं है ज़िंदगी अंदोह-गीं है ज़िंदगी वी बज़्मे-अहबाबे-वतन वी हमनवायाने-सुखन आते हैं जिस दम याद अब करते हैं दिल…

खाना-आबादी

तराने गूंज उठे हैं फजां में शादियानों के हवा है इत्र-आगीं, ज़र्रा-ज़र्रा मुस्कुराता है मगर दूर, एक अफसुर्दा मकां में सर्द बिस्तर पर कोई दिल है की हर आहट पे…

नज़रे-कालिज

ऐ सरज़मीन-ए-पाक़ के यारां-ए-नेक नाम बा-सद-खलूस शायर-ए-आवारा का सलाम ऐ वादी-ए-जमील मेंरे दिल की धडकनें आदाब कह रही हैं तेरी बारगाह में तू आज भी है मेरे लिए जन्नत-ए-ख़याल हैं…

शाहकार

मुसव्विर मैं तेरा शाहकार वापस करने आया हूं अब इन रंगीन रुख़सारों में थोड़ी ज़िदर्यां भर दे हिजाब आलूद नज़रों में ज़रा बेबाकियां भर दे लबों की भीगी भीगी सिलवटों…