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किस शह्‍र न शोहरा हुआ नादानी-ए-दिल का किस पर न खुला राज़

किस शह्‍र न शोहरा हुआ नादानी-ए-दिल का किस पर न खुला राज़ परीशानी-ए-दिल का आयो करें महफ़िल पे ज़रे-ज़ख़्म नुमायां चर्चा है बहुत बे-सरो-सामानी-ए-दिल का देख आयें चलो कूए-निगारां का…

ग़म-ब-दिल, शुक्र-ब-लब, मस्तो-ग़ज़लख़्वाँ चलिए जब तलक साथ तेरे उम्रे-गुरेज़ां चलिए

ग़म-ब-दिल, शुक्र-ब-लब, मस्तो-ग़ज़लख़्वाँ चलिए जब तलक साथ तेरे उम्रे-गुरेज़ां चलिए रहमते-हक से जो इस सम्त कभी राह निकले सू-ए-जन्नत भी बराहे-रहे-जानां चलिए नज़र मांगे जो गुलसितां से ख़ुदावन्दे-जहां सागरो-ख़ुम में…

तह-ब-तह दिल की कदूरत

तह-ब-तह दिल की कदूरत मेरी आंखों में उमंड आई तो कुछ चारा न था चारागर की मान ली और मैंने गरद-आलूद आंखों को लहू से धो लिया और अब हर…

बेदम हुए बीमार दवा क्यों नही देते तुम

बेदम हुए बीमार दवा क्यों नही देते तुम अच्छे मसीहा हो शफ़ा क्यों नहीं देते दर्दे-शबे-हिज्राँ की जज़ा क्यों नहीं देते ख़ूने-दिले-वहशी का सिला क्यों नहीं देते मिट जाएगी मखलूक़…

हम जो तारीक राहों में मारे गए

(ईथेल और जूलियस रोजनबर्ग के खतों से मुतासिर होकर लिखी गई) तेरे होंटों के फूलों की चाहत में हम दार की ख़ुश्क टहनी पे वारे गए तेरे हाथों की शम्म’ओं…

तिरी उमीद, तिरा इंतज़ार जब से है

तिरी उमीद, तिरा इंतज़ार जब से है न शब को दिन से शिकायत न दिन को शब से है किसी का दर्द हो करते हैं तेरे नाम रक़म गिला है…

शोरिशे-बरबतो-नै

  पहली आवाज़ अब सई का इमकां और नहीं, परवाज़ का मज़मूं हो भी चुका तारों पे कमन्दें फेंक चुके, महताब पे शबख़ूं हो भी चुका अब और किसी फ़रदा…

शफ़क़ की राख में जल-बुझ गया सितारः-ए-शाम,

  शफ़क़ की राख में जल-बुझ गया सितारः-ए-शाम, शबे-फ़िराक़ के गेसू फ़ज़ा में लहराए कोई पुकारो कि इक उम्र होने आई है फ़लक को क़ाफ़िलः-ए-रोज़ो-शाम ठहराए ये ज़िद है यादे-हरीफ़ाने-बादः…

कभी-कभी याद में उभरते हैं, नक़्शे-माज़ी मिटे-मिटे से वो

कभी-कभी याद में उभरते हैं, नक़्शे-माज़ी मिटे-मिटे से वो आज़माइश दिलो-नज़र की, वो क़ुरबतें-सी, वो फासले से कभी-कभी आरज़ू के सहरा में आ के रुकते हैं क़ाफ़िले से वो सारी…

दिल में अब, यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं

दिल में अब, यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं जैसे बिछड़े हुये का’बे में सनम आते हैं एक-इक कर के हुए जाते हैं तारे रौशन मेरी मंज़िल की तरफ़…

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए उस के बाद आए जो अज़ाब आए बामे-मीना से माहताब उतरे दस्ते-साक़ी में आफ़्ताब आए हर रगे-ख़ूँ में फिर चिराग़ाँ हो सामने फिर वो…

हम लोग

दिल के ऐवाँ में लिए गुमशुदा शम्मा’ओं की क़तार नूरे-ख़ुर्शीद से सहमे हुए, उकताए हुए हुस्ने-महबूब के सइयाल तसव्वुर की तरह अपनी तारीकी को भींचे हुए, लिपटाए हुए ग़ायते सूद-ओ-ज़ियाँ,…