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शिकस्त

अपने सीने से लगाये हुये उम्मीद की लाश मुद्दतों ज़ीस्त को नाशाद किया है मैनें तूने तो एक ही सदमे से किया था दो चार दिल को हर तरह से…

सरज़मीने-यास

जीने से दिल बेज़ार है हर सांस एक आज़ार है कितनी हज़ीं है ज़िंदगी अंदोह-गीं है ज़िंदगी वी बज़्मे-अहबाबे-वतन वी हमनवायाने-सुखन आते हैं जिस दम याद अब करते हैं दिल…

खाना-आबादी

तराने गूंज उठे हैं फजां में शादियानों के हवा है इत्र-आगीं, ज़र्रा-ज़र्रा मुस्कुराता है मगर दूर, एक अफसुर्दा मकां में सर्द बिस्तर पर कोई दिल है की हर आहट पे…

नज़रे-कालिज

ऐ सरज़मीन-ए-पाक़ के यारां-ए-नेक नाम बा-सद-खलूस शायर-ए-आवारा का सलाम ऐ वादी-ए-जमील मेंरे दिल की धडकनें आदाब कह रही हैं तेरी बारगाह में तू आज भी है मेरे लिए जन्नत-ए-ख़याल हैं…

शाहकार

मुसव्विर मैं तेरा शाहकार वापस करने आया हूं अब इन रंगीन रुख़सारों में थोड़ी ज़िदर्यां भर दे हिजाब आलूद नज़रों में ज़रा बेबाकियां भर दे लबों की भीगी भीगी सिलवटों…

इक खूबसूरत मोड़

चलो इक बार फिर से अज़नबी बन जाएँ हम दोनों न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखो दिलनवाज़ी की न तुम मेरी तरफ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से न मेरे दिल…

ख़ुद्दारियों के ख़ून को अरज़ाँ न कर

ख़ुद्दारियों के ख़ून को अरज़ाँ न कर सके हम अपने जौहरों को नुमायाँ न कर सके होकर ख़राब-ए-मय तेरे ग़म तो भुला दिये लेकिन ग़म-ए-हयात का दरमाँ न कर सके…

कुछ कत’ए

चन्द कलियाँ निशात की चुनकर मुद्दतों मह्वे-यास रहता हूँ तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ तपते दिल पर यूं गिरती है तेरी नज़र…

किसी को उदास देख कर

तुम्हें उदास सा पाता हूँ मैं काई दिन से ना जाने कौन से सदमे उठा रही हो तुम वो शोख़ियाँ, वो तबस्सुम, वो कहकहे न रहे हर एक चीज़ को…

एक मुलाक़ात

तिरी तड़प से न तड़पा था मेरा दिल,लेकिन तिरे सुकून से बेचैन हो गया हूँ मैं ये जान कर तुझे जाने कितना ग़म पहुचें कि आज तेरे ख़यालों में खो…

तुम्हारे साथ का मौसम बहारों के सरीखा था

तुम्हारे साथ का मौसम बहारों के सरीखा था। हमने गम में भी हंसना तुम्हारे साथ सीखा था॥ तुम्हीं ने जिन्दगी बदली, बदल फिर तुम गए कैसे? अब तो जिन्दगी का…

इसी दोराहे पर

अब न इन ऊंचे मकानों में क़दम रक्खूंगा मैंने इक बार ये पहले भी क़सम खाई थी अपनी नादार मोहब्बत की शिकस्तों के तुफ़ैल ज़िन्दगी पहले भी शरमाई थी, झुंझलाई…