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ऐ रौशनियों के शहर

सब्ज़ा-सब्ज़ा सूख रही है फीकी, ज़र्द दोपहर दीवारों को चाट रहा है तनहाई का ज़हर दूर उफ़ुक़ तक घटती-बढ़ती, उठती-गिरती रहती है कोहर की सूरत बेरौनक़ दर्दों की गँदली लहर…

मैं ज़मीं ता आसमाँ, वो कैद आतिशदान में धूप रिश्ता बन गई,

मैं ज़मीं ता आसमाँ, वो कैद आतिशदान में धूप रिश्ता बन गई, सूरज में और इन्सान में मैं बहुत दिन तक सुनहरी धूप खा आँगन रहा एक दिन फिर यूँ…

कोई न जान सका वो कहाँ से आया था  और उसने  

कोई न जान सका वो कहाँ से आया था और उसने धूूप से बादल को क्यों मिलाया था यह बात लोगों को शायद पसंद आयी नहीं मकान छोटा था लेकिन…

शबनम हूँ सुर्ख़ फूल पे बिखरा हुआ हूँ मैं  दिल मोम

शबनम हूँ सुर्ख़ फूल पे बिखरा हुआ हूँ मैं दिल मोम और धूप में बैठा हुआ हूँ मैं कुछ देर बाद राख मिलेगी तुम्हें यहाँ लौ बन के इस चराग़…

मिटने का खेल

मैं अनन्त पथ में लिखती जो सस्मित सपनों की बातें, उनको कभी न धो पायेंगी अपने आँसू से रातें! उड़ उड़ कर जो धूल करेगी मेघों का नभ में अभिषेक,…

मिलन

रजतकरों की मृदुल तूलिका से ले तुहिन-बिन्दु सुकुमार, कलियों पर जब आँक रहा था करूण कथा अपनी संसार; तरल हृदय की उच्छ्वास जब भोले मेघ लुटा जाते, अन्धकार दिन की…

धूप क्या है और साया क्या है

धूप क्या है और साया क्या है अब मालूम हुआ ये सब खेल तमाशा क्या है अब मालूम हुआ हँसते फूल का चेहरा देखूँ और भर आई आँख अपने साथ…

एक तस्वीर

सुबह की धूप खुली शाम का रूप फ़ाख़्ताओं की तरह सोच में डूबे तालाब अज़नबी शहर के आकाश धुंधलकों की किताब पाठशाला में चहकते हुए मासूम गुलाब घर के आँगन…

उड़ती किरणों की रफ़्तार से तेज़ तर

उड़ती किरणों की रफ़्तार से तेज़ तर नीले बादल के इक गाँव में जायेंगे धूप माथे पे अपने सजा लायेंगे साये पलकों के पीछे छुपा लायेंगे बर्फ पर तैरते रोशनी…

दालानों की धूप छतों की शाम कहाँ 

दालानों की धूप छतों की शाम कहाँ घर के बाहर घर जैसा आराम कहाँ बाज़ारों की चहल-पहल से रोशन है इन आँखों में मंदिर जैसी शाम कहाँ मैं उसको पहचान…