Tag Archives: dard

दर्द आयेगा दबे पांव

और कुछ देर में जब मिरे तनहा दिल को फ़िकर आ लेगी कि तनहायी का क्या चारा करे दर्द आएगा दबे पांव, लिये सुरख़ चिराग़ वह जो इक दर्द धड़कता…

हम जो तारीक राहों में मारे गए

(ईथेल और जूलियस रोजनबर्ग के खतों से मुतासिर होकर लिखी गई) तेरे होंटों के फूलों की चाहत में हम दार की ख़ुश्क टहनी पे वारे गए तेरे हाथों की शम्म’ओं…

ऐ रौशनियों के शहर

सब्ज़ा-सब्ज़ा सूख रही है फीकी, ज़र्द दोपहर दीवारों को चाट रहा है तनहाई का ज़हर दूर उफ़ुक़ तक घटती-बढ़ती, उठती-गिरती रहती है कोहर की सूरत बेरौनक़ दर्दों की गँदली लहर…

हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए काफ़िरों की नमाज़ हो जाए

हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए काफ़िरों की नमाज़ हो जाए दिल रहीने-नियाज़ हो जाए बेकसी कारसाज़ हो जाए मिन्नते-चाराःसाज़ कौन करे दर्द जब जाँ-नवाज़ हो जाए इश्क़ दिल में रहे…

चश्मे-मयगूँ ज़रा इधर कर दे दस्ते-कुदरत को बे-असर कर दे

चश्मे-मयगूँ ज़रा इधर कर दे दस्ते-कुदरत को बे-असर कर दे तेज़ है आज दर्दे-दिल साक़ी तल्ख़ी-ए-मय को तेज़तर कर दे जोशे-वहशत है तिश्नःकाम अभी चाक-दामन को ता-जिगर कर दे मेरी…

कोई हमारे दर्द का मरहम नहीं आशना नहीं दोस्त नहीं हम-दम नहीं

कोई हमारे दर्द का मरहम नहीं आशना नहीं दोस्त नहीं हम-दम नहीं आलम-ए-दीवानगी क्या ख़ूब है बे-कसी का वहाँ किसी कूँ ग़म नहीं ख़ौफ़ नहीं तीर-ए-तग़ाफूल सीं तिरे दिल हमारा…

इश्‍क़ की जो लगन नहीं देखा वो बिरह की अगन नहीं देखा

इश्‍क़ की जो लगन नहीं देखा वो बिरह की अगन नहीं देखा क़द्र मुज अश्‍क की वो क्या जाने जिस ने दुर्द-ए-अदन नहीं देखा तुज गली में जो कुई किया…

अरे ख्वाबे-मुहब्बत की भी क्या ता’बीर होती है

अरे ख्वाबे-मुहब्बत की भी क्या ता’बीर होती है. खुलें आँखे तो दुनिया दर्द की तस्वीर होती है. उमीदें जाए और फिर जीता रहे कोई. न पूछ ऐ दोस्त!क्या फूटी हुई…

आ ही जाती है मगर फिर भी मेरे दर्द की याद

आ ही जाती है मगर फिर भी मेरे दर्द की याद. गरचे है तर्के-मोहब्बत में भी आराम बहुत. और भी काम है दुनियाँ में ग़में-उल्फत को. उसकी याद अच्छी नहीं…

आह वो मंज़िले-मुराद,दूर भी है क़रीब भी

आह वो मंज़िले-मुराद,दूर भी है क़रीब भी. देर हुई कि क़ाफ़िले उसकी तरफ़ रवाँ नहीं. दैरो-हरम है गर्दे-राह,नक्शे-क़दम हैं मेहरो-माह. इनमें कोई भी इश्क़ की मंज़िले-कारवाँ नहीं. किसने सदा-ए-दर्द दी,किसकी…

इश्क़ तो दुनिया का राजा है

इश्क़ तो दुनिया का राजा है. किस कारन वैराग लिया है. ज़र्रा-ज़र्रा काँप रहा है. किसके दिल में दर्द उठा है. रोकर इश्क़ ख़ामोश हुआ है. वक़्त सुहाना अब आया…