Tag Archives: chandni

मैं बनी मधुमास आली

मैं बनी मधुमास आली! आज मधुर विषाद की घिर करुण आई यामिनी, बरस सुधि के इन्दु से छिटकी पुलक की चाँदनी उमड़ आई री, दृगों में सजनि, कालिन्दी निराली! रजत…

बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ

बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ! नींद थी मेरी अचल निस्पन्द कण कण में, प्रथम जागृति थी जगत के प्रथम स्पन्दन में, प्रलय में मेरा पता पदचिन्ह जीवन…

अतिथि

बनबाला के गीतों सा निर्जन में बिखरा है मधुमास, इन कुंजों में खोज रहा है सूना कोना मन्द बतास। नीरव नभ के नयनों पर हिलतीं हैं रजनी की अलकें, जाने…

विसर्जन

निशा की, धो देता राकेश चाँदनी में जब अलकें खोल, कली से कहता था मधुमास बता दो मधुमदिरा का मोल; बिछाती थी सपनों के जाल तुम्हारी वह करुणा की कोर,…

कितनी सदियों से ढूँढ़ती होंगी

कितनी सदियों से ढूँढ़ती होंगी तुमको ये चाँदनी की आवज़ें पूर्णमासी की रात जंगल में नीले शीशम के पेड़ के नीचे बैठकर तुम कभी सुनो जानम भीगी-भीगी उदास आवाज़ें नाम…

दूसरों को हमारी सज़ाएँ न दे

दूसरों को हमारी सज़ाएँ न दे चांदनी रात को बददुआएँ न दे फूल से आशिक़ी का हुनर सीख ले तितलियाँ ख़ुद रुकेंगी सदाएँ न दे सब गुनाहों का इकरार करने…

याद किसी की चांदनी बन कर कोठे-कोठे छिटकी है

याद किसी की चांदनी बन कर कोठे-कोठे छिटकी है याद किसी की धूप हुई है ज़ीना-ज़ीना उतरी है रात की रानी सहने-चमन में गेसू खोले सोती है रात बॆ रात…

वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिये बनाया है…