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कहाँ जाओगे

और कुछ देर में लुट जायेगा हर बाम पे चांद अकस खो जायेंगे आईने तरस जायेंगे अरश के दीदा-ए-नमनाक से बारी-बारी सब सितारे सर-ए-ख़ाशाक बरस जायेंगे आस के मारे थके-हारे…

सूरज भी बँधा होगा देखो मेरे बाजू में इस चाँद को भी रखना

सूरज भी बँधा होगा देखो मेरे बाजू में इस चाँद को भी रखना सोने के तराजू में अब हमसे शराफ़त की उम्मीद न कर दुनिया पानी नहीं मिल सकता तपती…

चाँद का टुकड़ा न सूरज का नुमाइन्दा हूँ मैं न इस बात पे नाज़ाँ हूँ

चाँद का टुकड़ा न सूरज का नुमाइन्दा हूँ मैं न इस बात पे नाज़ाँ हूँ न शर्मिंदा हूँ दफ़न हो जाएगा जो सैंकड़ों मन मिट्टी में ग़ालिबन मैं भी उसी…

ख़ुश रहे या बहुत उदास रहे ज़िन्दगी तेरे आस पास रहे

ख़ुश रहे या बहुत उदास रहे ज़िन्दगी तेरे आस पास रहे चाँद इन बदलियों से निकलेगा कोई आयेगा दिल को आस रहे हम मुहब्बत के फूल हैं शायद कोई काँटा…

वो जो शायर था चुप सा रहता था

वो जो शायर था चुप सा रहता था बहकी-बहकी सी बातें करता था आँखें कानों पे रख के सुनता था गूंगी ख़ामोशियों की आवाज़ें जमा करता था चाँद के साए…

अभिमान

छाया की आँखमिचौनी मेघों का मतवालापन, रजनी के श्याम कपोलों पर ढरकीले श्रम के कन, फूलों की मीठी चितवन नभ की ये दीपावलियाँ, पीले मुख पर संध्या के वे किरणों…

बैसाखियाँ

(एक वियतनामी जोड़े की तस्वीर देखकर) आओ हम-तुम इस सुलगती खामुशी में रास्ते की सहमी-सहमी तीरगी में अपने बाजू, अपनी सीने, अपनी आँखें फड़फड़ाते होंठ चलती-फिरती टाँगें चाँद के अन्धे…

रात चुपचाप दबे पाँव

रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है रात ख़ामोश है रोती नहीं हँसती भी नहीं कांच का नीला सा गुम्बद है, उड़ा जाता है ख़ाली-ख़ाली कोई बजरा सा बहा जाता…

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं चाँद पागल हैं अंधेरे में निकल पड़ता हैं मैं समंदर हूँ कुल्हाड़ी से नहीं कट सकता कोई फव्वारा नही हूँ जो उबल…

गुलाबी गाल तेरे

गुलाबी गाल तेरे जब देख पाते हैं होके खुशगवार पत्थरों में राह पाते हैं इक बार घूँघट ज़रा फिर से हटा दो दंग होने का दीवानों को मज़ा दो ताकि…

बिन मेरे

  इक सफर पर मैं रहा, बिन मेरे उस जगह दिल खुल गया, बिन मेरे वो चाँद जो मुझ से छिप गया पूरा रुख़ पर रुख़ रख कर मेरे, बिन…

यूँ ही बे-सबब न फिरा करो

यूँ ही बे-सबब न फिरा करो, कोई शाम घर में भी रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है, उसे चुपके-चुपके पढ़ा करो कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले…