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गुलाबी गाल तेरे

गुलाबी गाल तेरे जब देख पाते हैं होके खुशगवार पत्थरों में राह पाते हैं इक बार घूँघट ज़रा फिर से हटा दो दंग होने का दीवानों को मज़ा दो ताकि…

बिन मेरे

  इक सफर पर मैं रहा, बिन मेरे उस जगह दिल खुल गया, बिन मेरे वो चाँद जो मुझ से छिप गया पूरा रुख़ पर रुख़ रख कर मेरे, बिन…

यूँ ही बे-सबब न फिरा करो

यूँ ही बे-सबब न फिरा करो, कोई शाम घर में भी रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है, उसे चुपके-चुपके पढ़ा करो कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले…

सर से चादर बदन से क़बा ले गई

सर से चादर बदन से क़बा ले गई ज़िन्दगी हम फ़क़ीरों से क्या ले गई मेरी मुठ्ठी में सूखे हुए फूल हैं ख़ुशबुओं को उड़ा कर हवा ले गई मैं…

मेरे दिल की राख कुरेद मत

मेरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्करा के हवा न दे ये चराग़ फिर भी चराग़ है कहीं तेरा हाथ जला न दे मैं उदासियाँ न सजा सकूँ कभी…

हमारे हाथों में इक शक़्ल चाँद जैसी थी 

हमारे हाथों में इक शक़्ल चाँद जैसी थी तुम्हें ये कैसे बताएं वो रात कैसी थी महक रहे थे मिरे होंठ उसकी ख़ुश्बू से अजीब आग थी बिलकुल गुलाब जैसी…