Tag Archives: bhakti

मैया री मैं चंद लहौंगौ

मैया री मैं चंद लहौंगौ । कहा करौं जलपुट भीतर कौ, बाहर ब्यौंकि गहौंगौ ॥ यह तौ झलमलात झकझोरत, कैसैं कै जु लहौंगौ ? वह तौ निपट निकटहीं देखत ,बरज्यौ…

मैया मोहिं दाऊ बहुत खिझायो

  मैया मोहिं दाऊ बहुत खिझायो। मो सों कहत मोल को लीन्हों तू जसुमति कब जायो॥ कहा करौं इहि रिस के मारें खेलन हौं नहिं जात। पुनि पुनि कहत कौन…

मैया कबहुं बढ़ैगी चोटी

मैया कबहुं बढ़ैगी चोटी। किती बेर मोहि दूध पियत भइ यह अजहूं है छोटी॥ तू जो कहति बल की बेनी ज्यों ह्वै है लांबी मोटी। काढ़त गुहत न्हवावत जैहै नागिन-सी…

मैया! मैं नहिं माखन खायो।

मैया! मैं नहिं माखन खायो। ख्याल परै ये सखा सबै मिलि मेरैं मुख लपटायो॥ देखि तुही छींके पर भाजन ऊंचे धरि लटकायो। हौं जु कहत नान्हें कर अपने मैं कैसें…

अपणे करम को वै छै दोस

अपणे करम को वै छै दोस, काकूं दीजै रे ऊधो अपणे।।टेक।। सुणियो मेरी बगड़ पड़ोसण, गेले चलत लागी चोट। पहली ज्ञान मानहिं कीन्ही, मैं मत ताकी बाँधी पोट। मैं जाण्यूँ…

अजब सलुनी प्यारी मृगया नैनों

अजब सलुनी प्यारी मृगया नैनों। तें मोहन वश कीधोरे॥टेक॥ गोकुळमां सौ बात करेरे बाला कां न कुबजे वश लीधोरे॥१॥ मनको सो करी ते लाल अंबाडी अंकुशे वश कीधोरे॥२॥ लवींग सोपारी…

अच्छे मीठे फल चाख चाख

अच्छे मीठे फल चाख चाख, बेर लाई भीलणी। ऐसी कहा अचारवती, रूप नहीं एक रती। नीचे कुल ओछी जात, अति ही कुचीलणी। जूठे फल लीन्हे राम, प्रेम की प्रतीत त्राण।…

अखयाँ तरसा दरसण प्यासी

  अखयाँ तरसा दरसण प्यासी।।टेक।। मग जोवाँ दिण बीताँ सजणी, णैण पड्या दुखरासी। डारा बेठ्या कोयल बोल्या, बोल सुण्या री गासी। कड़वा बोल लोक जग बोल्या करस्याँ म्हारी हांसी। मीरां…

केहि समुझावौ सब जग

केहि समुझावौ सब जग अन्धा॥ ॥ इक दु होयँ उन्हैं समुझावौं सबहि भुलाने पेटके धन्धा। पानी घोड पवन असवरवा ढरकि परै जस ओसक बुन्दा॥ १॥ गहिरी नदी अगम बहै धरवा…

दिवाने मन भजन

दिवाने मन भजन बिना दुख पैहौ ॥ टेक॥ पहिला जनम भूत का पै हौ सात जनम पछिताहौ। काँटा पर का पानी पैहौ प्यासन ही मरि जैहौ॥ १॥ दूजा जनम सुवा…

झीनी झीनी बीनी चदरिया

झीनी झीनी बीनी चदरिया ॥ काहे कै ताना काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया ॥ १॥ इडा पिङ्गला ताना भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया ॥ २॥ आठ…

रे दिल गाफिल

रे दिल गाफिल गफलत मत कर एक दिना जम आवेगा॥ टेक॥ सौदा करने या जग आया पूजी लाया मूल गँवाया प्रेमनगर का अन्त न पाया ज्यों आया त्यों जावेगा॥ १॥…