Tag Archives: BHAJAN GOPAL

नटवर नागर नन्दा

नटवर नागर नन्दा, भजो रे मन गोविन्दा, श्याम सुन्दर मुख चन्दा, भजो रे मन गोविन्दा। तू ही नटवर, तू ही नागर, तू ही बाल मुकुन्दा , सब देवन में कृष्ण…

तोसों लाग्यो नेह रे प्यारे

तोसों लाग्यो नेह रे प्यारे, नागर नंद कुमार। मुरली तेरी मन हर्यो, बिसर्यो घर-व्यौहार॥ जब तें सवननि धुनि परि, घर आँगण न सुहाइ। पारधि ज्यूँ चूकै नहीं, मृगी बेधी दइ…

श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो

श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो। औरन सूँ खेलै धमार, म्हासूँ मुखहुँ न बोले हो॥ म्हारी गलियाँ ना फिरे वाके, आँगन डोलै हो। म्हारी अँगुली ना छुए वाकी, बहियाँ मरोरै हो॥…

नैना निपट बंकट छबि

नैना निपट बंकट छबि अटके। देखत रूप मदनमोहन को, पियत पियूख न मटके। बारिज भवाँ अलक टेढी मनौ, अति सुगंध रस अटके॥ टेढी कटि, टेढी कर मुरली, टेढी पाग लट…

मैया री मैं चंद लहौंगौ

मैया री मैं चंद लहौंगौ । कहा करौं जलपुट भीतर कौ, बाहर ब्यौंकि गहौंगौ ॥ यह तौ झलमलात झकझोरत, कैसैं कै जु लहौंगौ ? वह तौ निपट निकटहीं देखत ,बरज्यौ…

मैया मोहिं दाऊ बहुत खिझायो

  मैया मोहिं दाऊ बहुत खिझायो। मो सों कहत मोल को लीन्हों तू जसुमति कब जायो॥ कहा करौं इहि रिस के मारें खेलन हौं नहिं जात। पुनि पुनि कहत कौन…

मैया कबहुं बढ़ैगी चोटी

मैया कबहुं बढ़ैगी चोटी। किती बेर मोहि दूध पियत भइ यह अजहूं है छोटी॥ तू जो कहति बल की बेनी ज्यों ह्वै है लांबी मोटी। काढ़त गुहत न्हवावत जैहै नागिन-सी…

मैया! मैं नहिं माखन खायो।

मैया! मैं नहिं माखन खायो। ख्याल परै ये सखा सबै मिलि मेरैं मुख लपटायो॥ देखि तुही छींके पर भाजन ऊंचे धरि लटकायो। हौं जु कहत नान्हें कर अपने मैं कैसें…

अपणे करम को वै छै दोस

अपणे करम को वै छै दोस, काकूं दीजै रे ऊधो अपणे।।टेक।। सुणियो मेरी बगड़ पड़ोसण, गेले चलत लागी चोट। पहली ज्ञान मानहिं कीन्ही, मैं मत ताकी बाँधी पोट। मैं जाण्यूँ…

अजब सलुनी प्यारी मृगया नैनों

अजब सलुनी प्यारी मृगया नैनों। तें मोहन वश कीधोरे॥टेक॥ गोकुळमां सौ बात करेरे बाला कां न कुबजे वश लीधोरे॥१॥ मनको सो करी ते लाल अंबाडी अंकुशे वश कीधोरे॥२॥ लवींग सोपारी…

अखयाँ तरसा दरसण प्यासी

  अखयाँ तरसा दरसण प्यासी।।टेक।। मग जोवाँ दिण बीताँ सजणी, णैण पड्या दुखरासी। डारा बेठ्या कोयल बोल्या, बोल सुण्या री गासी। कड़वा बोल लोक जग बोल्या करस्याँ म्हारी हांसी। मीरां…

मेरे तो गिरिधर गोपाल

मेरे तो गिरिधर गोपाल दूसरो न कोई। जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई। तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई॥। छाँड़ि दी कुल की कानि कहा करिहै कोई। संतन…