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आशक होवैं तां इशक कमावैं ।।

आशक होवैं तां इशक कमावैं ।। राह इशक दा सूई दा नक्का, तागा होवे तां जावैं ।1। बाहर पाक अन्दर आलूदा, क्या तूं शेख कहावैं ।2। कहै हुसैन जे फारग…

बुतान-ए-माहवश उजड़ी हुई मंज़िल में रहते हैं

बुतान-ए-माहवश उजड़ी हुई मंज़िल में रहते हैं के जिस की जान जाती है उसी के दिल में रहते हैं हज़ारों हसरतें वो हैं कि रोके से नहीं रुकतीं बहोत अर्मान…

रविश-ए-गुल है कहां यार हंसाने वाले

रविश-ए-गुल है कहां यार हंसाने वाले हमको शबनम  की तरह सब है रूलाने वाले सोजिशे-दिल का नहीं अश्क बुझाने वाले बल्कि हैं और भी यह आग लगाने वाले मुंह पे सब जर्दी-ए-रूखसार कहे देती…

अश्क आंखों में कब नहीं आता

अश्क आंखों में कब नहीं आता लहू आता है जब नहीं आता। होश जाता नहीं रहा लेकिन जब वो आता है तब नहीं आता। दिल से रुखसत हुई कोई ख्वाहिश…