Tag Archives: aarzoo

न जी भर के देखा न कुछ बात की

न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं कहाँ दिन गुज़ारा कहाँ रात की उजालों की परियाँ…

हम तुझसे किस हवस की फलक जुस्तुजू करें

हम तुझसे किस हवस की फलक जुस्तुजू करें दिल ही नहीं रहा है जो कुछ आरजू करें तर-दामनी* पे शेख हमारी ना जाईयो दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वजू करें…

आरजू है वफ़ा करे कोई

आरजू है वफ़ा करे कोई जी न चाहे तो क्या करे कोई गर मर्ज़ हो दवा करे कोई मरने वाले का क्या करे कोई कोसते हैं जले हुए क्या क्या…

मुमकिन नहीं कि तेरी मुहब्बत की बू न हो

मुमकिन नहीं कि तेरी मुहब्बत की बू न हो काफ़िर अगर हज़ार बरस दिल में तू न हो क्या लुत्फ़े-इन्तज़ार जो तू हीला-जू न हो किस काम का विसाल अगर आरज़ू न हो ख़लवत में तुझको…

होते होते चश्म से आज अश्क-बरी रह गई

होते होते चश्म से आज अश्क-बरी रह गई आबरू बारे तेरी अब्र-ए-बहारी रह गई. आते आते इस तरफ़ उन की सवारी रह गई दिल की दिल में आरज़ू-ए-जाँ-निसारी रह गई.…

रात भर मुझको गम-ए-यार ने सोने न दिया

रात भर मुझको गम-ए-यार ने सोने न दिया सुबह को खौफे शबे तार न सोने न दिया शम्अ की तरह मुझे रात कटी सूली पर चैन से यादे कदे यार…