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आंसुओं से धुली ख़ुशी की तरह

आंसुओं से धुली ख़ुशी की तरह रिश्ते होते हैं शायरी की तरह जब कभी बादलों में घिरता है चाँद लगता है आदमी की तरह किसी रोज़न किसी दरीचे से सामने…

यूँ ही बे-सबब न फिरा करो

यूँ ही बे-सबब न फिरा करो, कोई शाम घर में भी रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है, उसे चुपके-चुपके पढ़ा करो कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले…

उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता 

उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता हज़ारों जुगनुओं से भी अँधेरा कम नहीं होता कभी बरसात में शादाब बेलें सूख जाती हैं हरे पेड़ों के गिरने का…

दालानों की धूप छतों की शाम कहाँ 

दालानों की धूप छतों की शाम कहाँ घर के बाहर घर जैसा आराम कहाँ बाज़ारों की चहल-पहल से रोशन है इन आँखों में मंदिर जैसी शाम कहाँ मैं उसको पहचान…

कौन आया रास्ते आईनाख़ाने हो गए

कौन आया रास्ते आईनाख़ाने हो गए रात रौशन हो गई दिन भी सुहाने हो गए क्यों हवेली के उजड़ने का मुझे अफ़सोस हो सैकड़ों बेघर परिंदों के ठिकाने हो गए…

सितम ही करना जफ़ा ही करना निगाह-ए-लुत्फ़ कभी न करना

सितम ही करना जफ़ा ही करना निगाह-ए-लुत्फ़ कभी न करना तुम्हें क़सम है हमारे सर की हमारे हक़ में कमी न करना कहाँ का आना कहाँ का जाना वो जानते…