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उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं बाइस-ए-तर्क-ए मुलाक़ात बताते भी नहीं मुंतज़िर हैं दमे रुख़सत के ये मर जाए तो जाएँ फिर ये एहसान के हम छोड़…

यूँ ही बे-सबब न फिरा करो

यूँ ही बे-सबब न फिरा करो, कोई शाम घर में भी रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है, उसे चुपके-चुपके पढ़ा करो कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले…

होंठों पे मुहब्बत के फ़साने नहीं आते

होंठों पे मुहब्बत के फ़साने नहीं आते साहिल पे समुंदर के ख़ज़ाने नहीं आते पलकें भी चमक उठती हैं सोते में हमारी आँखों को अभी ख़्वाब छुपाने नहीं आते दिल…

कोई लश्कर है कि बढ़ते हुए ग़म आते हैं 

कोई लश्कर है कि बढ़ते हुए ग़म आते हैं शाम के साए बहुत तेज़ क़दम आते हैं दिल वो दरवेश है जो आँख उठाता ही नहीं इसके दरवाजे पे सौ…

सोये कहाँ थे आँखों ने तकिये भिगोए थे 

सोये कहाँ थे आँखों ने तकिये भिगोए थे हम भी कभी किसी के लिए ख़ूब रोए थे अँगनाई में खड़े हुए बेरी के पेड़ से वो लोग चलते वक़्त गले…

सुनो पानी में किसकी सदा है 

सुनो पानी में किसकी सदा है कोई दरिया की तह में रो रहा है सवेरे मेरी इन आँखों ने देखा ख़ुदा चारों तरफ़ बिखरा हुआ है समेटो और सीने में…

उदास आँखों से आँसू नहीं निकलते हैं

उदास आँखों से आँसू नहीं निकलते हैं ये मोतियों की तरह सीपियों में पलते हैं घने धुएँ में फ़रिश्ते भी आँखें मलते हैं तमाम रात खजूरों के पेड़ जलते हैं…

तेरी महफ़िल में यह कसरत कभी थी

तेरी महफ़िल में यह कसरत कभी थी हमारे रंग की सोहबत कभी थी इस आज़ादी में वहशत कभी थी मुझे अपने से भी नफ़रत कभी थी हमारा दिल, हमारा दिल…

न जाओ हाल-ए-दिल-ए-ज़ार देखते जाओ

न जाओ हाल-ए-दिल-ए-ज़ार देखते जाओ कि जी न चाहे तो नाचार देखते जाओ बहार-ए-उमर् में बाग़-ए-जहाँ की सैर करो खिला हुआ है ये गुलज़ार देखते जाओ उठाओ आँख, न शरमाओ ,ये…