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जय हो,

जय हो, जय हो जय हो, जय हो आजा आजा जिंद शामियाने के तले, आजा ज़रीवाले नीले आसमान के तले जय हो, जय हो जय हो, जय हो रत्ती रत्ती…

रुबाई

लहरों में खिला कंवल नहाए जैसे दोशीज़: ए सुबह गुनगुनाए जैसे ये रूप, ये लोच, ये तरन्नुम, ये निखार बच्चा सोते में मुसकुराए जैसे दोशीज़: ए बहार मुसकुराए जैसे मौज…

आना

जो मुखरित कर जाती थी मेरा नीरव आवाहन, मैं ने दुर्बल प्राणों की वह आज सुला दी कम्पन! थिरकन अपनी पुतली की भारी पलकों में बाँधी, निस्पन्द पड़ी हैं आँखें…

बैसाखियाँ

(एक वियतनामी जोड़े की तस्वीर देखकर) आओ हम-तुम इस सुलगती खामुशी में रास्ते की सहमी-सहमी तीरगी में अपने बाजू, अपनी सीने, अपनी आँखें फड़फड़ाते होंठ चलती-फिरती टाँगें चाँद के अन्धे…

मूल के मूल में आ

कब तलक उलटा चलेगा, अब सीधे आ छोड़ कुफ़्र की राह, अब चल दीन की राह इस डंक में देख दवा, और डंक खा अपनी ख़ाहिश के मूल के मूल…

अज्मतें सब तिरी ख़ुदाई की

अज्मतें सब तिरी ख़ुदाई की हैसियत क्या मिरी इकाई की मेरे होंठों के फूल सूख गए तुमने क्या मुझसे बेवफाई की सब मिरे हाथ पाँव लफ्ज़ों के और आँखें भी…

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना 

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना कोई सूखा पेड़ मिले तो उससे लिपट के रो लेना इसके बाद बहुत तन्हा हो जैसे जंगल का रास्ता…

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जायेगा

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जायेगा मगर तुम्हारी तरह कौन मुझे चाहेगा तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लायेगा ना जाने कब तेरे…

अत्तन मैं क्युं आई सां

अत्तन मैं क्युं आई सां, मेरी तन्द न पईआ काय । आउंद्यां उठि खेडनि लगी, चरखा छड्या चाय ।। कत्तन कारन गोढ़े आंदे, गया बलेदा खाय ।1। होरनां दियां अड़ी…

क्यों चुराते हो देखकर आँखें

क्यों चुराते हो देखकर आँखें कर चुकीं मेरे दिल में घर आँखें ज़ौफ़ से कुछ नज़र नहीं आता कर रही हैं डगर-डगर आँखें चश्मे-नरगिस को देख लें फिर हम तुम…

कहाँ थे रात को हमसे ज़रा निगाह मिले

कहाँ थे रात को हमसे ज़रा निगाह मिले तलाश में हो कि झूठा कोई गवाह मिले तेरा गुरूर समाया है इस क़दर दिल में निगाह भी न मिलाऊं तो बादशाह…