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हवस की आँख सीं वो चेहरा-ए-रौशन न देखोगे

हवस की आँख सीं वो चेहरा-ए-रौशन न देखोगे तो चेहरा तो कहाँ पन-गोशा-ए-दामन ने देखोगे छुपाते हो सो बेजा उस जमाल-ए-हैरत-ए-अफ़ज़ा कूँ मिरी आँखों सीं देखोगे तो फिर दर्पन न…

हर जलवे से एक दरस-ए-नुमू लेता हू

हर जलवे से एक दरस-ए-नुमू लेता हूँ लबरेज़ कई जाम-ओ-सुबू लेता पड़ती है जब आँख तुझपे ऐ जान-ए-बहार संगीत की सरहदों को छू लेता हूँ हर साज़ से होती नहीं…

जो बात है हद से बढ़ गयी है 

जो बात है हद से बढ़ गयी है वाएज़ के भी कितनी चढ़ गई है हम तो ये कहेंगे तेरी शोख़ी दबने से कुछ और बढ़ गई है हर शय ब-नसीमे-लम्से-नाज़ुक…

निकल आये इधर जनाब कहाँ 

निकल आये इधर जनाब कहाँ रात के वक़्त आफ़ताब कहाँ सब खिले हैं किसी के आरिज़ पर इस बरस बाग़ में गुलाब कहाँ मेरे होंठों पे तेरी ख़ुश्बू है छू…

आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा

आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा, कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा बेवक़्त अगर जाऊँगा, सब चौंक पड़ेंगे इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा…

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में, कि मेरी नज़र को ख़बर न हो मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर न हो वो बड़ा रहीमो-करीम है, मुझे…

रुबाइयाँ shah hussain

1 आईना जो हाथ उस के ने ता-देर लिया इस देर से ख़जलत ने हमें घेर लिया जब हम ने कहा क्या यही आशिक़ है मियाँ ये सुनते ही आईने…

हसरतें ले गए इस बज़्म से चलने वाले

हसरतें ले गए इस बज़्म से चलने वाले हाथ मलते ही उठे इत्र के मलने वाले वो गए गोर-ए-गरीबाँ पे तो आई ये सदा थम ज़रा ओ रविश-ए-नाज़ से चलने…